हवाओं से लिपट कर के , जरा मैंने कहा रुकना ,
अभी आँचल उड़ाती -सी उसी की याद आयेगी //
उसी की शोखियाँ होंगी ,उसी की मस्तियाँ होंगी ,
फिजाओं को लजाती -सी , हसीं सौगात आयेगी //
यहाँ जो स्वप्न बिखरे हैं ,जरा उनको समेटूंगा ,
उसी के हाथ की कोई बुनी तकदीर लौटूंगा //
उसी से रूठना है फिर ,उसी को फिर मनाना है ,
उसी के प्यार की कोई ,नई तस्वीर खींचूंगा //
बहारों को पता है ये ,अगर फिर चूड़ियाँ खनकीं ,
उसी के रश्क में डूबी , शबे -बारात आयेगी //
निशानी जो बचीं उसकी ,जिलाती जा रहीं हैं वो,
दृगों में जो भरा पानी , बहाती जा रहीं हैं वो //
उसी की हलचलों में यह , समय कुछ बीत जाता है ,
कहीं दिल की दराजों में ,समाती जा रहीं हैं वो //
दिशाओं में महकती है , कहीं वो रात -रानी -सी ,
कदम हौले बदाती -सी ,दिले -नाशाद आएगी //
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