शुक्रवार, 30 सितंबर 2011

इतना आसान नहीं है दिल को ,वर्फ बना कर मैं रख दूँ
ये पिघलेगा ,बह जायेगा ,जाने क्या -क्या कर जायेगा ,
इतना आसान नहीं है इसको सिर्फ सलामत मैं रख लूँ
यह सीने में जब धड्केगा खींच तुम्हें भी ले आयेगा /
,
भरे रहते हैं वो समंदर जिनमें हम कभी नहाये थे
मौजों के साथ उमड़ कर जिनमें छींटे बहुत उड़ाये थे
भीगी -पलकों पर जब तुमने , होंठ लगाये थे वो अपने
मत पूछो कितनी बारिश का , वो मौसम हमने देखा था ,
वो कितने गेसू दलके थे ,वो कितनी ठंडक बरसी थी
मत पूछो कितने अरमानों का घिरना हमने देखा था /

गुरुवार, 29 सितंबर 2011

वो दरख़्त झूमे तो ,लगा जान बाकी है
वो फूल खिले तो , लगा मुस्कान बाकी है ,
पंछी चहचहाये , लगा उड़ान बाकी है
ख्यालों में छुपा कोई पशेमान बाकी है /
वो दरख़्त जब झूमे ,लगा जान बाकी है
वो फूल जब खिले, लगा मुस्कान बाकी है ,
पंछी जब चहचहाये , लगा उड़ान बाकी है
ख्याल जब बहुत आये ,समाधान बाकी है
तुमको पाना , तुमको खोना ,खो -खो कर, फिर तुमको पाना ,
आखिर क्यों जीने का मन है , मितवा मेरे मुझे बताना /

बुधवार, 28 सितंबर 2011

तुमको पाना , तुमको खोना ,खो -खो कर, फिर तुमको पाना ,
आखिर क्यों जीने का मन है ,

मंगलवार, 27 सितंबर 2011

बटोर लेता हूँ अक्सर चाँदनी को
बिखेर देता हूँ अक्सर आस -पास ,
देख लेता हूँ अक्सर अक्स तुम्हारे
झीलों में जब घुल जाते हैं आकाश /
कौन कहता है कि उनसे बात नहीं होती
वो पहली -सी अजल मुलाकात नहीं होती ,
जब तक घूम रही है जमीं अपनी धुरी पर
आगाज तो हैं मगर आबाज नहीं होती /
जिन्दगी जब बात अपनी , कह न पाई कुछ किसी से ,
रिमझिमाते - बादलों में , भीगना अच्छा लगा था ,
दर्द जब संभले नहीं ,बहने लगे थे बेशुमार ,
कागजों की नाव में वो , तैरना अच्छा लगा था ,
जिन्दगी जब बात अपनी , कह न पाई कुछ किसी से ,
बादलों की रिमझिमों में , भीगना अच्छा लगा था ,
दर्द जब संभले नहीं ,बहने लगे थे बेशुमार ,
कागजों की नाव में कुछ तैरना अच्छा लगा था ,

सोमवार, 26 सितंबर 2011

बह रहीं हैं हर तरफ से प्यार में भीगीं हवायें ,
लो तुम्हारी याद में फिर गुनगुनाती हैं फिजायें ,
जब तलक हमको हमारी , आकृति तुममें दिखेगी ,
इस धरा पर जन्म लेंगी , भाव-भीनी कल्पनायें /

रविवार, 25 सितंबर 2011

मुझे सिसकते से दिल के सैलाबों में बहना है
कहाँ किनारे टूटेंगे जाने क्या-क्या सहना है ,
होता है जब हाहाकार समय के लम्हे-लम्हे में
शब्द भला क्या अब पूरे को कहना है ,
धूप ,हवा , या सर्दी, गर्मी , तुमको छूकर ही लगती थी ,
फूल अगर कोई खिलता था , खुशबु तुमसे ही मिलती थी ,
पता नहीं कितने अहसासों का मौसम तुममें शामिल था ,
दुनिया की हर विरल नफासत , आवेशित तुमसे मिलती थी /
धूप ,हवा , या सर्दी, गर्मी , तुमको छूकर ही लगती थी ,
फूल अगर कोई खिलता था , खुशबु तुमसे ही मिलती थी ,
पता नहीं कितने अहसासों का मौसम तुममें शामिल था ,
दुनिया में कुछ चीज अगर थी , तुममें ही बस वो मिलती थी /

शनिवार, 24 सितंबर 2011

मुझपर कुछ नहीं था लोग छीनते रहे
एक आदमी को जिन्दा भूनते रहे
बोटियों पर मेरी चाक़ू गवाह हैं
वो मुझमें खुद को दूंदते रहे /
हमसे जब रहा न गया ,कुछ भी कहा न गया
एक गुमसुम जिन्दगी का दर्द सुना न गया ,
बहते रहे दूर तक एक अजनबी की तरह
ख्याल उनका ,जब भी आया संभला न गया /

शुक्रवार, 23 सितंबर 2011

दुनिया में जितने साये हैं तुमसे ही खिलकर आये हैं
ये साँसें जब भी आती हैं अरमान उभरकर आये हैं ,
हो सकता है खो जायें हम जानी -अनजानी राहों में
प्यार भरा दिल जब भी उमड़ा तूफ़ान न कुछ कर पाये हैं
जानता हूँ कुछ न बचेगा एक दिन
यह दुनिया हो भी या न हो एक दिन
सीने में दफन कर भी लूँ तुम्हें अगर
फिर भी तुम ही तुम बचोगी एक दिन

बुधवार, 21 सितंबर 2011

हम कभी बिछड़ सकते हैं सोचा न था
जगह बिछड़ने की होगी सोचा न था
लोग हवा में बातें करते हैं यहाँ
बिन तुम्हारे जमीं होगी सोचा न था /

मंगलवार, 20 सितंबर 2011

जितना समेटकर लाये थे दिल को उतना ही बिखेर डाला
लो फिर सिलसिला शुरू है सबकुछ आपमें ही उंडेल डाला

सोमवार, 19 सितंबर 2011

जो सवाल तुमने उठाये जबाब उनके लिख रहा हूँ
किताब मंहगी न हो जाये हिसाब दिल के लिख रहा हूँ /

शुक्रवार, 16 सितंबर 2011

जब भी कोई मौसम आया
मना -मना कर तुमको लाया
बिना तुम्हारे धूप न निकली
तुमने दिन भर बहुत सताया /
आँखों से वो जब भी गुजरा
छन - छनकर ही तुमसे गुजरा
झिलमिल करती रही तुम्हारी
दिव्य -अलौकिक -भौतिक छाया /
जब भी कोई मौसम आया
मना -मना कर तुमको लाया
बिना तुम्हारे धूप न निकली
तुमने दिन भर बहुत सताया /
आँखों से वो जब-जब गुजरा
बिना तुम्हारे कभी न गुजरा
कितने रंग सुनहले देखे
तुमसा कोई द्रश्य न पाया /
जब भी कोई मौसम आया
मना -मना कर तुमको लाया
बिना तुम्हारे धूप न निकली
तुमने दिन भर बहुत सताया

बुधवार, 14 सितंबर 2011

समुन्दर साथ बहता था , तुम्हारे साथ रहता था ,
वो दिल का एक कोना था बड़ा महफूज रहता था,
तरो- ताजा -से गुजरे थे हजारों मील के रस्ते ,
समुन्दर -सी निगाहों में कोई महबूब रहता था ,
समुन्दर साथ बहता था , तुम्हारे साथ रहता था ,
वो दिल का एक कोना था बड़ा महफूज रहता था,
तुम्हारे साथ गुजरे थे हजारों मील के रस्ते ,
समुन्दर -सी निगाहों में कोई महबूब रहता था ,
समुन्दर साथ बहता था , तुम्हारे साथ रहता था ,
वो दिल का एक कोना था बड़ा महफूज रहता था,
तुम्हारे साथ गुजरे थे हजारों मील के रस्ते ,
निगाहों के समुन्दर में कोई महबूब रहता था ,

मंगलवार, 13 सितंबर 2011

समुन्दर साथ बहता था , तुम्हारे साथ रहता था ,
वो दिल का एक कोना था बड़ा महफूज रहता था,
तुम्हारे साथ गुजरे थे हजारों मील के रस्ते ,
निगाहों में कोई महबूब रहता था ,

गुरुवार, 8 सितंबर 2011

तुमपर जो अधिकार न होता , शायद कुछ भी और न होता,
तुमपर जो अधिकार न होता , शायद कुछ भी और न होता,
पलकों में जो स्वप्न भरे थे , मदिर-मदिर से हो जाते थे ,
तुम्हें निगाहों में भरते ही, चाँद - सितारे शरमाते थे ,

बुधवार, 7 सितंबर 2011

अगर तुम्हारा प्यार न होता ,शायद कुछ भी और न होता
दिल ही दिल में गुजर गया जो , ऐसा कोई दौर न होता

सोमवार, 5 सितंबर 2011

हजरात हकीकत क्या होगी ,अंदाज लगा सकते हैं ,
उससे पहले भी यदि चाहें ,इक दाँव लगा सकते हैं ,
झंकृत कैसे होगा मन ये ,साज नहीं , परवाज नहीं,
छेड़ें कैसे हर धड़कन को ,उठती अब आबाज नहीं ,
तस्वीरें बस उभर -उभर कर, नजरों में ही रह जाती हैं ,
नजरें भी बस पिघल- पिघल कर, तस्वीरों में बह जातीं हैं ,

रविवार, 4 सितंबर 2011

हमने दिल को चीरा जब भी, तेरा उसमें पता लिखा था
हमने जब भी पलकें खोलीं ,तेरा उनमें धुंआ भरा था ,
बादल जब भी आकर बरसे ,इस धरती की हरियाली पर ,
जब भी तेरी बात चली तो आँसू से हर कुआं भरा था /
माना हमने दिल के कतरे नहीं बिखेरे अब तक शायद
इन कतरों के हर मंजर में तुम ही तुम हो पता किसे है ,

मेरी पलकें कब सूखीं थीं ,पता नहीं क्यों धरती भीगी ,
इनमें सपने तैर रहे थे पता नहीं क्यों किश्ती डूबी ,
इनमें मौसम आकर उतरे ,इनमें रस के बादल बरसे ,
इनमें कोई समा गया था ,फिर क्यों झरती कलियाँ दीखीं ,
मेरी पलकें कब सूखीं थीं ,पता नहीं क्यों धरती भीगी ,
इनमें सपने तैर रहे थे पता नहीं क्यों किश्ती डूबी ,
लगता कोई हार गया है ,खुद ही खुद को मार रहा है
जीत न पाया वो खुद को ही कितना अत्याचार हुआ है ,

शनिवार, 3 सितंबर 2011

पक्षी तिनकों को चुन -चुनकर एक घरोंदा बुन लेते हैं
हम भी चाहें तो सपनों का भारत निर्मित कर सकते हैं ,

देखो कितना वक्त गुजारा ,नहीं तुम्हारे बिना गुजारा
पल अब तक जितने भी गुजरे ,सब में था बस भरम तुम्हारा ,
इन आँखों में जो सपने हैं ,कुछ टूटे हैं ,कुछ लुटने हैं ,
अगर कभी खाली हो जायें,इनमें तुम बस जाते रहना ,
देखो कितना वक्त गुजारा ,नहीं तुम्हारे बिना गुजारा
पल अब तक जितने भी गुजरे ,सब में था बस भरम तुम्हारा ,
बहें हवायें जब तक शीतल याद हमें तुम आते रहना
दूर न होना इन नजरों से थोडा -सा शरमाते रहना ,
पता नहीं कितनी हलचल है इस मौसम की ख़ामोशी में
अगर लगे कुछ बहक रहे हैं सीने से लग जाते रहना ,

शुक्रवार, 2 सितंबर 2011

बहें हवायें जब तक शीतल याद हमें तुम आते रहना
दूर न होना इन नजरों से थोडा -सा शरमाते रहना ,

गुरुवार, 1 सितंबर 2011

PublicTushar Devendrachaudhry
‎-every moment I enjoy your love
the lake of my eyes full of you
as sun shine spreads everywhere
the whole of my body reflect you .
the shadow of grief live within me ,
but I never leave to deflect you .