tushar
गुरुवार, 29 सितंबर 2011
वो दरख़्त झूमे तो ,लगा जान बाकी है
वो फूल खिले तो , लगा मुस्कान बाकी है ,
पंछी चहचहाये , लगा उड़ान बाकी है
ख्यालों में छुपा कोई पशेमान बाकी है /
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
नई पोस्ट
पुरानी पोस्ट
मुख्यपृष्ठ
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें