tushar
मंगलवार, 13 सितंबर 2011
समुन्दर साथ बहता था , तुम्हारे साथ रहता था ,
वो दिल का एक कोना था बड़ा महफूज रहता था,
तुम्हारे साथ गुजरे थे हजारों मील के रस्ते ,
निगाहों में कोई महबूब रहता था ,
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
नई पोस्ट
पुरानी पोस्ट
मुख्यपृष्ठ
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें