tushar
बुधवार, 21 सितंबर 2011
हम कभी बिछड़ सकते हैं सोचा न था
जगह बिछड़ने की होगी सोचा न था
लोग हवा में बातें करते हैं यहाँ
बिन तुम्हारे जमीं होगी सोचा न था /
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