tushar
रविवार, 25 सितंबर 2011
धूप ,हवा , या सर्दी, गर्मी , तुमको छूकर ही लगती थी ,
फूल अगर कोई खिलता था , खुशबु तुमसे ही मिलती थी ,
पता नहीं कितने अहसासों का मौसम तुममें शामिल था ,
दुनिया की हर विरल नफासत , आवेशित तुमसे मिलती थी /
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
नई पोस्ट
पुरानी पोस्ट
मुख्यपृष्ठ
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें