tushar
शुक्रवार, 30 सितंबर 2011
भीगी -पलकों पर जब तुमने , होंठ लगाये थे वो अपने
मत पूछो कितनी बारिश का , वो मौसम हमने देखा था ,
वो कितने गेसू दलके थे ,वो कितनी ठंडक बरसी थी
मत पूछो कितने अरमानों का घिरना हमने देखा था /
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