शुक्रवार, 13 अप्रैल 2012

Dinesh Verma-- अगर कम शब्दों में सच कहना हो तो ऐसे कहूँगा कि आपकी रचनाओं की गहराई को जिसने समझ लिया, फिर वो इस में इतना डूबेगा उतरायेगा कि उसे अपना होश तक न रहेगा..इसका कारण ये है कि आपने खुद इतना डूब कर लिखा है कि आप भी उस गहराई से उबर न सके... आपको और आपकी लेखनी को नमन.

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