जिन्दगी डूबे अगर तो डूब जाये बस तुम्हीं में ,
साँस जितनी भी चले अब भीग जाये बस तुम्हीं में ,
मैं उतरता जा रहा हूँ उन ख्यालों के भंवर में ,
होश मेरे खींच लें जो आखिरी अब बस तुम्हीं में //
खिल गए कितने सजीले फूल मेरी भावना में ,
मिल गये कितने नशीले कूल मेरी कामना में ,
बस तुम्हारी ज्योत्स्नाएं अब मुझे नहला रहीं हैं ,
चाहता हूँ झिलमिलाऊं मैं पिघलकर बस तुम्हीं में /
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