आपकी पुस्तक "भीगे पथ से अग्नि पथ तक" मिली
पहले पन्ने से आखरी पन्ने तक का सफ़र आपकी जीयन यात्रा से परिचय करता प्रतीत होता है...सरल भाषा,दिल को छूते शब्द बहुत गहरे असर करते है
कुछ पढ़ा है बहुत कुछ पढना,समझना और भीतर तक उतरना बाकि है अभी...कुछ कविताये जो मुझे बहुत पसंद आई
मै जीवित हूँ मेरा भ्रम है
जिन्दा तो बस मेरा श्रम है
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जितना बादलों में पानी है
उतना नयनो में नीर भरा है
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जिसकी कीमत दे न सका मै
ख़ुशी कहाँ से मेरी होती
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प्यार का मंदिर ढहा तो किस लिए
कम नहीं थी यातनाये भी यहाँ
बहुत-बहुत आभार आपका एक नई दुनिया से परिचय करने का
कविता पंड्या
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