फूलों जबतक खिलो धरा पर ,खिलना लेकर उसकी यादें ,
अपनी खुशबु में बिखराना ,उसकी सारी ताज़ी यादें ,
वो आयेगी ,मुझे पता है ,बीच तुम्हारे वो आयेगी ,
इतने कोमल हो जाना तुम ,जितनी उसकी रेशम यादें ,
अभी जहाँ तक ये दुनिया है , उसकी सूरत दीख रही है,
इस दुनिया की हर रौनक में, उसकी झिलमिल दीख रही है,
तुम्हें पता क्या ,दिल की धड़कन ,इस दुनिया में क्यों उठती है ,
शायद पूरी दुनिया में कुछ ,उसकी हलचल दीख रही है,
पंखुड़ियों पर ओस गिरे तो ,समझो उसकी नजर पड़ी है,
नहीं मिलेंगी कहीं चमन में ,उसकी जैसी भीगी यादें ,
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